बुधवार, 17 जून 2015

                जाएं तो जाएं कहां 
    आज टीवी पर एक खवर आई कि मदर डेरी के दूध में डिटजैंट एवं अन्य घातक रसायन मिल है जिसकी पुष्टि कलकत्ता स्थिति लैव से हुई है।इससे पहले अमूल के दूध में घातक रसायन की भी खवर आई थी।दूध के बारे में पहले ही इतना कहा सुना जा चुका है कि आपको भी पढने की  इच्छा नही होगी और मेरी लिखने  की भी इच्छा नहीं हो रही है।परन्तु विषय इतना समंवेदनशील है कि बिना कुछ कहे रहा भी नहीं जाता है।पूरी राजनीतिक पार्टियां दूसरे ही गुणा गणित में लगी रहती है ।टीवी में भी मुख्य खवर ललित मोदी एवं अन्य खवरों पर आ रही है यह खवर तो एक लाइन में आ जाती है।इन दोनों ब्राड के दूध देश में लाखो करोड़ों लोग इस्तेमाल करते है।इससे होने वाले नुकसान के बारे में हम सभी जानते हैं लिखने से क्या फायदा।नेस्ले के मैगी के बाद इसी कम्पनी के सेरेलेक से भी कीडों की मिलने की भी खवर आ रही है।
           अभी मै मेनका गांधी द्वारा लिखित एक लेख द हिन्दूं में The Milky Way लेख पढ रहा था जिसमें उन्होंने दूध का प्रयोग बन्द करने की बात कही है पर क्या यह संभव है वह बडें लोग है वह दूध का प्रयोग छोड़ सकते है पर आम जनता नहीं।दूध के बिना तो मैं तो कल्पना भी नहीं कर सकता।दूध हमारे जीवन में तो रच बस गया है।हमारे यहां तो हर चीज में मिलावट ही मिलावट है मेरी स्वयंसेवी सस्थाओं एवं राजनीतिक पार्टियों से गुजारिश है कि इस बारे में एक जवरजस्त   अभियान चला कर अच्छे दिनों को लाने में मदद करें।.

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