रविवार, 21 जून 2015

योग दिवस

                हां, मैने भी योग किया
दो दिन पहले से ही टीवी पर योग छाया रहा।विभिन्न समुदायों, राजनीतिक पार्टियों, एवं लोगों ने अपने अपने विचार व्यक्त  किए।इस दिवस को सफल बनाने में मीडिया की भूमिका अहम रही।मेरे घर के पास ही एक बाटिका में यह आयोजन सपन्न हुआ।यहां के आयोजक RSS के लोग थे तो जाहिर है कि उनका एजेन्डा तो था ही परन्तु लोग योग के लिए इकठ्ठा हुए थे और सभी ने योग किया।
                  लगता था कि योग केवल बीजेपी द्वारा ही प्रयोजित क्रायक्रर्म है दूसरे दलों के नेताओं ने इस क्रार्यक्रम में भाग नही लिया यह दुर्भागय ही है ।केवल आपवाद रहे श्री अरविन्द केजरीवाल जिन्होने दिल्ली में प्रधानमंञी के साथ योग किया ।इसके लिये वे बधाई के पात्र हैं।
             योग सवके लिए अच्छा है परन्तु देश में 19 करोड़ लोग भूखे सोते है उनकों तो रोटी ही योग है।चालीस फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार है उनके लिए तो भोजन ही योग है।वे मजदूर जो सुवह ही काम पर चले जाते है उनके लिए योग का कोई मतलब ही नहीं है या वे महिलाएं जो सुवह से ही घर या खेत में काम करने चली जाती है उनके लिये भी योग बेकार की क्रिया है।

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