Mountain Man
दशरथ मांझी
आज टीवी पर फिल्म Mountain Man का Ad. आ रहा था पहले तो मैने चेनल बदलना चाहा पर पता नहीं क्या हुआ उसी को देखने लगा।फिर दशरथ माझी का नाम आया तो थोडी उत्सुकता बढी फिर मैने दशरथ मांझी के बारे में जानने का प्रयास किया तो मुझे पता चला कि मेरा सामान्य ज्ञान कितना कम है।
मै एक ऐसे व्यक्ति के बारे में नहीं जानता जिसने एक असम्भव काम को सम्भव बनाया।दशरथ मांझी का प्यार शाहजंहा से कहीं अघिक बडा था।शाहजंहा का बनाया ताज को दुनिया देखने जाती है पर आफशोश कि मांझी का नाम भी हम नहीं जानते हैं।शाहजहां के पास तो असीम संसाधन था पर मांझी के पास तो केवल हथौडा एवं एक टोकरी थी।
दशरथ मांझी के बारे में जो कहा जाए वह कम है. वे करिश्माई शख्स थे. जिस तरह मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने प्यार की खातिर संगमरमर का ताज महल बना डाला था, उसी तरह उस इंसान ने अपनी पत्नी की खातिर पहाड़ का सीना चीर डाला और अपना पूरा जीवन सड़क बनाने के लिए झोंक दिया. उस शख्स ने दिन देखा, न रात देखी, उसका सिर्फ एक ही लक्ष्य था, पहाड़ को काटकर राह बनाना, जिससे उसका जीवन आसान हो सके, जिसे वे प्यार करता था। यह किसी जादुई कहानी से कम नहीं है लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि यह सच है.
दशरथ मांझी का जन्म 1934 में हुआ इनकी पली का नाम फागुनी देवी था फागुनी देवी की मृत्यु 1959 मे हुई जव वह पहाड के बीच से अपने पति को खाना देने जा रहीं थी ।वह पहाडों में फिसल कर गिर गई थी।मांझी बिहार में गया के पास एक गावं के रहने वाले थे ।यह पेशे से मजदूर थे।इनके गांव से अस्पताल की दूरी 70 किमी थी ।मांझी ने अपने अकेले दम पर 22 साल पहाड़ को काट कर यह दूरी 15किमी कर दिया।मांझी ने जव काम शुरू किया तो लोग उन्हें पागल कहते थे ।बाद मे कुछ लोगो ने खाना पहुंचाना शुरू किया।माझां ने 360 फुट लम्बे एवं 25 फुट गहरे पहाड़ को काट कर 30फुट चौडी सडक से अपने गावं को ब्लाक बजीरगंज को जोड़ दिया ।
आज माझीं के नाम पर फिल्म बन रही है परन्तु उनके एकलौते बेटे बेहद गरीवी में जीवन काट रहे है
ऐसे मांझी एवं उनके जज्बे को बार बार सलाम।


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