बुधवार, 29 जुलाई 2015

हाय ये मजबूरियां

        हाय रे ये मजबूरियां 

छोटे छोटे बच्चे कहीं कलाकार  का काम करते दिख जाते है तो बड़ा आश्चर्य होता है कि कैसे यह इस उम्र में यह सव कर लेते हैं चाहे सर्कस के बच्चे हों या फिल्म में बाल कलाकर।कहीं पहले पढा था कि उडीसा मे एक छ्ह साल की बच्ची 60 किमी की दौड़ लगा देती है ।बाद में प्रेस में हल्ला मचा तो उसकी दौड़ बन्द करनी पडी कयोकि  इस बच्ची की हडियों के टेढे हो जाने का खतरा था।इसी ढंग से अभी प्रर्दशित फिल्म बगरंगी भाई जान में बाल कलाकार का चयन एक हजार बच्चियों के बाद किया गया। टीवी सीरियल उड़ान में चकोर का अभिनय देख कर लगता है कि  कितना रियाज करना होता होगा 
             यह तो हुआ उन लोगों की बात जो बहुत मजबूरी में काम नहीं करते है परन्तु बहुत से बच्चे जो रोटी के लिए काम करते है उनके दर्द को जानने वाला कोई नहीं है ।आज शाम हमारे कालोनी में रस्सी पर करतब दिखाने वाली लड़की को देखा तो यह देख कर यह सोच आई कि कहीं यह लड़की रस्सी से गिर गई तो इसके अस्पताल का खर्च कौन उठायेगा।पर हाय रे ये मजबूरी।

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