प्लास्टिक के चावल
खतरे का असली समय अब आ गया है।अव तक जो नकली चीजे आती थी उन्हें हम उपयोग में लाना छोड़ देते है या उपयोग में कम लाते हैं परन्तु अब जो खबर आ रही है वह बेहद भयानक एवं डराने वाली है।कुछ दिन पहले टीवी में चीन की एक फैक्टरी में नकली चावल बनता दिखाया जा रहा था।साथ में यह भी बताया कि यह चावल दक्षिण भारत में बिक रहा है ।कल खवर आई कि गुजरात के किसी शहर में यह चावल 29रूपया किलो बिक रहा है।मतलब यह कि खतरा सिर पर खड़ा है ।हो सकता है कि यह चावल हम लोगों के क्षेञ मे भी बिक रहा हो अतएव हमे बहुत सावधान रहने की जरुरत है ।यह यह चावल आलू, शकरकंद और सिंथेटिक
रेसिन से बना चावल है। यह आसानी से नहीं पचता
और कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। इसी
तरह, चीन में एक खास तरह का चावल पैदा होता है
वुनचांग, जो खुशबू से पहचाना जाता है। इसकी
पैदावार महज आठ लाख टन होती है, लेकिन दुनिया
भर के बाजारों में एक करोड़ टन चावल हर साल बेचा
जाता है। यानी 90 लाख से टन ज्यादा मिलावटी
चावल लोग खाते हैं।
चावल रोटी दाल यह तो हम लोगों का रोज का खाना है इसमे मिलावट होना जीवन से खेलना है।
चीन अपने सस्ते सामानों के लिए मशहूर है परन्तु इतना ही बदनाम है अपने नकली सामानों के लिए।यहां हम कुछ चीन द्वारा बनाए जा रहे नकली चीजों की सूची बताते हैं_
1चूहे का मटन : चूहों, ऊदबिलाव और लोमड़ियों के
मांस में रसायन मिलाकर मटन के रूप में बेचा जाता है।
वेई नामक एक विक्रेता ने खुलासा किया कि वह दस
करोड़ रुपए का मांस बेच चुका है। उसने चूहे, ऊदबिलाव
और लोमड़ी के मांस में नाइट्रेट, जिलेटिन तथा
कार्मिन मिलाया था।
2. कैमिकल टोफू : यह सोया मिल्क से बनने वाली
पनीर जैसी डिश है। दो फैक्टरियों में मारे गए छापों
में पता चला कि वहां आटे में मोनोसोडियम
ग्लूटामेट और रंग मिलाकर नकली टोफू बनाए जा रहे
हैं। कहीं-कहीं चमड़े को कैमिकल में गलाकर भी टोफू
बेचे जा रहे थे।
3. सुअर का मांस : दुनियाभर में सुअर के पतले मांस
की जबरदस्त मांग रहती है। इसके लिए उन्हें 'लीन मीट
पावडर' खिलाया जाता है। यह इनसानों के हार्ट के
लिए बहुत हानिकारक है। 2002 में दुनियाभर में
प्रतिबंध लग चुका है, लेकिन चीन में कुछ मीट
प्रोसेसिंग कंपनियां अब भी इस्तेमाल कर रही हैं।
4. गत्ते की ब्रेड : चीनी सड़क विक्रेता गत्ते से डबल
रोटी तैयार करते थे। इसके लिए वे केमिकल में गत्ते को
मिलाकर मुलायम करते फिर उसमें सुअर की चर्बी और
फ्लेवर्ड पाउडर मिलाते थे। इसके बाद इसका स्टफ
बनाकर भाप में पकाते थे। मजेदार बात यह है कि इस
रिपोर्ट का खुलासा करने वाले सीटीवी के पत्रकार
को हिरासत में लिया था। चीनी सरकार ने कहा
कि विदेशी मीडिया इस मामले को काफी उछाल
रही है। दरअसल, यह सिर्फ अफवाह है।
5. नकली शहद : चीन में नकली शहद सबसे ज्यादा
जिनान प्रांत में बिकता है। एक किलो नकली शहद
बनाने में 10 युआन का खर्च आता है, जो कि 60 युआन
में बिकता है। मजेदार बात यह है कि नकली शहद
असली शहद से भी ज्यादा असली और स्वादिष्ट
लगता है। इस खबर के सामने आने के बाद चीन के
अखबारों में असली और नकली शहद की पहचान के
लिए निर्देश छापे गए थे। चीन दुनिया का सबसे बड़ा
शहद उत्पादक देश है, जो दूसरे देशों में भी इसका
निर्यात करता है। एक अध्ययन में पता चला है कि
फ्रांस में बेचे गए कुल शहद में से 10 फीसद नकली था,
जो या तो पूर्वी यूरोप में बना था या चीन में।
6. नकली अंडा : मुर्गी के अंडे भी कृत्रिमतौर पर
बनाने के मामले में भी चीन काफी चर्चित रहा है।
फर्जी अंडे का खोल कैल्सियम कार्बोनेट से तैयार
किया जाता था। वहीं, अंडे का पीला व सफेद
हिस्सा क्रमश: सोडियम एल्गीनेट, फिटकरी,
जिलेटिन, खाने योग्य कैल्सियम क्लोराइड, पानी
और खाने का रंग डालकर बनाया जाता था। सबसे
पहले सोडियम एल्गीनेट और गरम पानी को मिलाकर
नकली अंडे के खोल में डाला जाता था। इसके बाद
उसमें जिलेटिन, बेनजॉइक एसिड, एलम समेत दूसरे
केमिकल के जरिए अंडे का सफेद द्रव्य तैयार किया
जाता था। अंडे का खोखा तैयार करने के लिए
पैराफिन मोम, जिप्सम पाउडर, कैल्सियम पाउडर
सहित अन्य चीजों का उपयोग किया जाता है।
7. नकली राइस नूडल्स : दक्षिण चीन में 2010 में सड़े
अनाज और कैंसर पैदा करने वाली चीजों जैसे सल्फर
डाईऑक्साइड को मिलाकर राइस नूडल्स बनाए गए
और भारी मात्रा में बेचे गए थे। दक्षिण चीन के
डोंगुआन शहर में 50 फैक्टरियां प्रतिदिन बासी व सड़े
अनाज से करीब पांच लाख किलोग्राम रेसेदार राइस
नूडल्स का उत्पादन कर रही थीं। उत्पादन करने
वाली फैक्िट्रयों में खराब चावल को ब्लीच करने के
बाद उसमें सल्फर डाई ऑक्साइड की तरह की अन्य
चीजें मिलाकर चावल से बनने वाले नूडल्स की
अपेक्षा तीन गुना अधिक राइस नूडल्स बनाती थीं।
जब इन नकली राइस नूडल्स को कुछ सुवरों को
खिलाया गया, तो पाया गया कि उनके अंग
कमजोर हो गए थे और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
हो गईं थीं।
8. नकली शराब : चीन के सेंट्रल टेलीविजन
(सीटीवी) की रिपोर्ट में बताया गया था कि
चीन में बिकने वाली करीब आधी शराब नकली है।
चीन की वाइन इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों
का मानना है कि देश में बिकने वाली करीब 90
फीसद प्रीमियम वाइन नकली है। इस समस्या से
निजात पाने के लिए गुआंगडोंग प्रांत में वाइन
टेस्टिंग सेंटर की स्थापना की गई, ताकि असली
वाइन का पता किया जा सके। वाइन
उत्पादनकर्ताओं ने भी सरकार का साथ दिया और
ऐसा ऐप बनाया, जिससे वाइन की बोतलों और
कार्टून के जरिये पता लगाया जा सके कि वे असली
हैं या नकली। एक दबिश के दौरान चीन की पुलिस ने
40 हजार बोतल नकली शराब बरामद की थी,
जिसकी कीमत करीब 3.2 करोड़ डॉलर थी। वर्ष
2012 में पुलिस ने नकली शराब के 350 मामले दर्ज कर
कार्रवाई की थी।
9. डक ब्लड : चीन में बत्तख के खून को गाढ़ा कर
उसकी स्लाइस बनाई जाती हैं जो खूब महंगी
बिकती हैं। इससे डब ब्लड टोफू भी बनता है। कुछ लोग
सुअर या भैंस के खून में कैमिकल मिलाकर धोखाधड़ी करते है।