OROR वन रैंक वन रिश्वत
वन रैंक वन पेन्सन का मामला करीब करीब स़ुलझ गया है पर इसे देख कर समाज के दूसरे बर्ग से भी समानता की मांग उठने लगी है।
कल एक वरिष्ट भष्ट नेता मिले उनका कहना था कि हम तो 70 के दशक के भ्रष्ट हैं, तब मंत्री को भी रिश्वत में हद से हद 20-30 करोड़ मिलते थे। हाल के मंत्री तो एक-एक घोटाले में अरबों-खरबों कमा गए। टेलीकॉम घोटाले में किसी मंत्री ने 1,76,000 लाख करोड़ रुपये अंदर कर लिए थे। समान रैंक, समान रिश्वत का फंडा लागू हो, तो हर मंत्री को कम से कम 1,76,000 लाख करोड़ की रकम मिलनी ही चाहिए।
मंत्रियों की समानता अगर इस स्तर पर होने की बात हो, तो समूची भारतीय अर्थव्यवस्था लुट लेगी, फिर भी मंत्रियों में वैसी वन रैंक, वन रिश्वत वाली समानता स्थापित न हो पाएगी।
मंत्री तो समानता से वंचित ही रहने वाले हैं। देश गरीब है, उनके लेवल की समानता अफोर्ड न कर सकता।
पर कई विभागों की समानता तो स्थापित हो सकती है। प्राइमरी शिक्षा विभाग के चपरासी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के चपरासी के बीच तो समान रैंक, समान रिश्वत लागू हो सकती है। प्राइमरी शिक्षा विभाग का चपरासी इनकम टैक्स के आम चपरासी के मुकाबले कतई कुपोषित लगता है।
यूं हो कि जो चपरासी इनकम टैक्स में खराब काम करे, उसे बतौर दंड प्राइमरी एजुकेशन में भेज दिया जाए और प्राइमरी शिक्षा में कोई चपरासी अगर ठीक-ठाक काम करे, तो उसे इनकम टैक्स में भेज दिया जाए, कुछ समय के लिए। इस तरह से हम पूरी तौर पर तो नहीं, पर आंशिक तौर पर तो समान रैंक, समान रिश्वत की व्यवस्था लागू कर सकते हैं।
दिल्ली पुलिस की रिश्वत से ईर्ष्याग्रस्त उत्तराखंड का एक पुलिस वाला बता रहा था कि समान रैंक तो दूर, उत्तराखंड के ऊंची रैंक के पुलिस अफसर की भी वैसी रिश्वत नहीं है, जैसी आम तौर पर दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल को मिल जाती है। उत्तराखंड पुलिस को दिल्ली पुलिस में मौके मिलने चाहिए, समान रैंक-समान रिश्वत का मौका मिलना चाहिए।
पूरे तौर पर नहीं, तो आंशिक तौर पर समान रैंक, समान रिश्वत लागू होनी चाहिए।
इस तरह पूरे देश में समानता लागू होना चाहिए क्योकि हमारा संविधान भी समानता के अधिकार की बात करता है।कई आफिसों में कुछ सीटें कमाई की होती है कुछ सूखी यह भेदभाव बन्द होना चाहिए कुछ थाने काफी मालदार होते है कुछ काम चलाऊ ।यह भेद भाव खत्म होना चाहिए।इसलिए 0R0R लागू होना ही चाहिए।
इस बारे में आप की क्या राय है कृपया बताएं।
वन रैंक वन पेन्सन का मामला करीब करीब स़ुलझ गया है पर इसे देख कर समाज के दूसरे बर्ग से भी समानता की मांग उठने लगी है।
कल एक वरिष्ट भष्ट नेता मिले उनका कहना था कि हम तो 70 के दशक के भ्रष्ट हैं, तब मंत्री को भी रिश्वत में हद से हद 20-30 करोड़ मिलते थे। हाल के मंत्री तो एक-एक घोटाले में अरबों-खरबों कमा गए। टेलीकॉम घोटाले में किसी मंत्री ने 1,76,000 लाख करोड़ रुपये अंदर कर लिए थे। समान रैंक, समान रिश्वत का फंडा लागू हो, तो हर मंत्री को कम से कम 1,76,000 लाख करोड़ की रकम मिलनी ही चाहिए।
मंत्रियों की समानता अगर इस स्तर पर होने की बात हो, तो समूची भारतीय अर्थव्यवस्था लुट लेगी, फिर भी मंत्रियों में वैसी वन रैंक, वन रिश्वत वाली समानता स्थापित न हो पाएगी।
मंत्री तो समानता से वंचित ही रहने वाले हैं। देश गरीब है, उनके लेवल की समानता अफोर्ड न कर सकता।
पर कई विभागों की समानता तो स्थापित हो सकती है। प्राइमरी शिक्षा विभाग के चपरासी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के चपरासी के बीच तो समान रैंक, समान रिश्वत लागू हो सकती है। प्राइमरी शिक्षा विभाग का चपरासी इनकम टैक्स के आम चपरासी के मुकाबले कतई कुपोषित लगता है।
यूं हो कि जो चपरासी इनकम टैक्स में खराब काम करे, उसे बतौर दंड प्राइमरी एजुकेशन में भेज दिया जाए और प्राइमरी शिक्षा में कोई चपरासी अगर ठीक-ठाक काम करे, तो उसे इनकम टैक्स में भेज दिया जाए, कुछ समय के लिए। इस तरह से हम पूरी तौर पर तो नहीं, पर आंशिक तौर पर तो समान रैंक, समान रिश्वत की व्यवस्था लागू कर सकते हैं।
दिल्ली पुलिस की रिश्वत से ईर्ष्याग्रस्त उत्तराखंड का एक पुलिस वाला बता रहा था कि समान रैंक तो दूर, उत्तराखंड के ऊंची रैंक के पुलिस अफसर की भी वैसी रिश्वत नहीं है, जैसी आम तौर पर दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल को मिल जाती है। उत्तराखंड पुलिस को दिल्ली पुलिस में मौके मिलने चाहिए, समान रैंक-समान रिश्वत का मौका मिलना चाहिए।
पूरे तौर पर नहीं, तो आंशिक तौर पर समान रैंक, समान रिश्वत लागू होनी चाहिए।
इस तरह पूरे देश में समानता लागू होना चाहिए क्योकि हमारा संविधान भी समानता के अधिकार की बात करता है।कई आफिसों में कुछ सीटें कमाई की होती है कुछ सूखी यह भेदभाव बन्द होना चाहिए कुछ थाने काफी मालदार होते है कुछ काम चलाऊ ।यह भेद भाव खत्म होना चाहिए।इसलिए 0R0R लागू होना ही चाहिए।
इस बारे में आप की क्या राय है कृपया बताएं।
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